Thursday, 28 June 2018

हेयर स्पा क्या है, घर पर कैसे करें और फायदे Tips For Hair Spa at Home In Hindi

हेयर स्पा क्या है, घर पर कैसे करें और फायदे Tips For Hair Spa at Home In Hindi – You Should Always Choose For Hair Spa With Care

अगर आप अपने बालों को हेल्दी रखना चाहती है तो इसके लिए हेयर स्पा अच्छा ऑप्शन है. क्योंकि हेयर स्पा में बालों की कंडीशन को ध्यान में रखकर ट्रीटमेंट किया जाता है.

हेयर स्पा एक ऐसा ट्रीटमेंट है, जिसके लिए आपको ज्यादा पैसा भी नहीं खर्च करना पड़ता और बालों की सभी समस्याओं से आसानी से छुटकारा भी मिल जाता है.
हेयर स्पा में स्काल्प ट्रीटमेंट, डैंड्रफ, रिबाइंडिंग के बालों का उपचार किया जाता है, इसके अलावा पलूशन, हेयर ड्रायर व कैमिकल प्रोडक्ट्स वगैरह रोजाना इस्तेमाल करने से बाल खराब हो जाते हैं, जिसमें बालों का पतला होना, उनका दो मुंह का होना व बेजान होना मुख्य है.

हेयर स्पा क्या है What Is Hair Spa

  • हेयर स्पा बालों पर किया जाने वाला एक खास तरह का ट्रीटमेंट है. इसमें मसाज, क्रीम, मशीन और हेयर मास्क का प्रयोग किया जाता है.
  • बालों में हेयर स्पा करने से पहले इस बात का ध्यान रखा जाता है कि आपके बालों का टेक्सचर क्या है, वह तैलीय है, रूखे हैं या फिर किसी अन्य समस्या से जूझ रहे हैं.
  • हेयर स्पा का कोई भी ट्रीटमेंट करने से पहले बालों को शैंपू किया जाता है.
  • बालों में पसीना आने और उन पर गंदगी जम जाने से स्कैल्प पर पर दाने, फुंसियां, जैसी दिक्कतें हो जाती है और बाल गिरने लगते हैं. ऐसे बालों को उनके टेक्सचर के मुताबिक क्रीम चुनकर उससे तकरीबन 45 मिनट मसाज दी जाती है.
  • इसके बाद मशीन से बालों, बाहों व पीठ पर अल्ट्रावायलेट रेंज दी जाती है, इससे बालों में बैक्टीरिया खत्म होते हैं और सिर पर शरीर की अन्य त्वचा भी आराम महसूस करती है.
  • इसके बाद क्रो मशीन से बालों को सॉफ्ट कर दिया जाता है, फिर हेयर कंस्ट्रक्शन मशिने का इस्तेमाल किया जाता है.
  • इसके बाद बालों को दोबारा शैंपू से धोया जाता है. अगर बाल ज्यादा डैमेज्ड नहीं है तो महीने में एक बार यह ट्रीटमेंट लेना काफी है, अगर बालों में समस्या है तो हफ्ते में दो बार ट्रीटमेंट को ले.
  • हेयर स्पा में हेयर मास्क का होना भी बहुत जरूरी है. यह इस प्रक्रिया में खास मायने रखता है. इस मास्क में क्रीम की मात्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है.
  • बारिश के दिनों में क्रीम में उन चीजों की मात्रा को बढ़ा दिया जाता है, जो नमी को दूर करने का काम करती है.


स्पा कब कराना चाहिए When To Go For Spa 

  • जब बालों में कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई हो जैसे कि बालों का रुखा सूखा होना, दो मुंहा, झड़ना और बेजान होना, इसके अलावा जब बाल रूखे या बहुत अधिक तैलीय हो गए हो और डेंड्रफ भी हो तो हेयर स्पा लेना बहुत फायदेमंद होता है. जैसे-

यदि हों ड्राई हेयर 

  • यह एक डीप कंडीशनिंग ट्रीटमेंट है, अगर आपके बाल रूखे और बेजान हैं तो इसे हफ्ते में एक बार कर ले अन्यथा महीने में दो बार ही काफी है.
  • घर पर ही स्पा करने के लिए ऑलिव ऑयल ले. बालों को गर्म पानी से धो कर तेल की हल्के हाथों से मसाज करें और पूरे सिर में अच्छी तरह तेल लगे लें. इसके बाद प्लास्टिक बैग से बालों को लपेटकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें. इसके बाद बाद हेयर मास्क लगाएं.


हेयर मास्क कैसे बनाएं

  • हेयर मास्क बनाने के लिए एक अंडा, एक चम्मच कैस्टर ऑयल, एक नींबू का रस, एक चम्मच शहद और एक चम्मच गिल्सरीन लें. इन चीजों को एगबीटर से अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस मिक्सचर को एक घंटे के लिए बालों पर लगा लें और प्लास्टिक शॉवर कैप पहन लें.
  • हेयर मास्क बनाने के लिए एक पका केला, दो चम्मच मेयोनीज, एक चम्मच शहद का पेस्ट बालों पर लगाकर 25 मिनट के लिए छोड़ दें और गुनगुने पानी से सिर को धो ले, इससे बाल मुलायम हो जाएंगे.
  • यदि हों डैमेज्ड हेयर
  • बालों को कलर करवाने, हॉट रोलर्स, पर्मिंग और दूसरे कैमिकल्स के प्रयोग करने से बालों को नुकसान पहुंचता है. हेयर स्पा के जरिए डिफ्रीजर, हेयर मास्क और ऑयल ट्रीटमेंट देकर कुछ सीटिंग में इस समस्या को दूर किया जा सकता है.

घर पर करें स्पा How To Do Hair Spa at Home in hindi
इस्तेमाल में आने वाली चीजें

  • शैंपू, टॉवल, चौड़े दांतों वाली काम्ब और हेयर कंडीशनिंग किट.
  • आप चाहे तो घर पर ही हेयर स्पा कर सकती है. इसके लिए सबसे पहले जैतून के गुनगुने तेल से मसाज करें और फिर बालों को स्टीम दे. स्टीम के दस मिनट बाद माइल्ड शैंपू से बालों को धो दे, फिर बालों में हेयर स्पा क्रीम लगा कर अच्छी तरह से मसाज करें और कुछ देर बाद पानी से बालों को धो दे.
  • इस बात का ख्याल रखे कि हेयर स्पा क्रीम का प्रयोग करने के 48 घंटे के बाद ही शैंपू का प्रयोग करें.
  • हेयर एक्सपर्ट ने बताया कि जब बाल 80 प्रतिशत सूख जाए तभी कंघी करनी चाहिए. बालों में ड्रायर का प्रयोग कम से कम करना चाहिए ताकि बाल कम टूटे.

स्पा के लिए माहौल बनाए

  • खुद को रिलेक्स करने के लिए आपको स्पा का सही माहौल बनाना होगा. इस दौरान आप मोबाइल बंद रखे ताकि कोई आपको डिस्टर्ब ना करे.
  • अच्छा वातावरण बनाए रखने के लिए थोड़ी सी रोशनी रखें और हल्का म्यूजिक चलाएं.
  • मोमबत्तियों का इस्तेमाल करें, स्पा तैयार करते वक्त बाथटब के चारों ओर लाइट बंद कर मोमबत्तियां जलाएं.
  • आप खुशबू वाली मोमबत्तियों का इस्तेमाल कर सकती है.
  • पार्टनर से मदद ले और उनसे सिर में तेल की हल्की-हल्की मसाज करवाएं. लेकिन इस दौरान भी आप लोग आपस में बात ना करें बल्कि माहौल पूरी तरह से शांत होना चाहिए.

स्पा के फायदे hair spa ke fayde in hindi

  • स्पा में तमाम तरह की नेचुरल चीजें यूज़ की जाती है. इसमें मसाज के जरिए मसल्स पर एक खास तरह का प्रेशर डाला जाता है, जो तनाव व थकान मिटाने के साथ साथ फिजिकल और मेंटल हेल्थ करने के साथ सिर से जुड़ी कई बीमारियों से भी हमें बचाता है.
  • आजकल कलर थैरेपी का ट्रेंड काफी बढ़ गया है. इसके अनुसार सभी बीमारियां और समस्याएं हमारे शरीर में मौजूद रंगों के असंतुलन की वजह से होती है और स्पा इन पर काफी ध्यान देता है.
  • वैसे स्पा सेशन में डिटाक्सिफिकेशन, रिलैक्सेशन, हीलिंग एंड बैलेंसिंग, स्टिमुलेशन जैसे स्टेप्स शामिल होते हैं.
स्पा सेंटर में जाते समय सावधानियां care while going for hair spa

  • अपने लिए एक अच्छा स्पा सेंटर चुनिए, जिसने इससे संबंधित कोई कोर्स किया हो या उसकी पूरी जानकारी हो अन्यथा मसाज करते वक्त गलत जगह पर दबाव बनाने से आप अन्य किसी समस्या से भी जुझ सकते हैं.
  • आपके पार्लर में साफ सफाई व स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाता हो यह भी देख लें अन्यथा प्रॉब्लम आपको ही होगी.
  • अगर आपको किसी खास तेल या क्रीम से एलर्जी हो तो यह बात पहले ही बता दे ताकि उसका इस्तेमाल कम किया जाए.
  • बहुत जल्दी-जल्दी स्पा कराना भी ठीक नहीं है, इसलिए जब जरुरी लगे या फिर आपकी स्पा सीटिंग का टाइम हो तभी स्पा कराए.
  • स्पा सेंटर घर के पास हो तो अच्छा है, क्योंकि इसे कराने में समय लगता है या फिर थोड़ा समय निकाल कर आइए, अगर घर जल्दी जाने का टेंशन है तो मत आइए क्योंकि इससे आप शांत और तनाव रहित मन से स्पा नहीं करा पाएंगे और इसका असर आपके स्पा ट्रीटमेंट पर पड़ेगा.


Monday, 25 June 2018

उत्तराखंड का छोटा-सा हिल स्टेशन औली, जो हर मौसम में लगता है खूबसूरत

जब उत्तर भारत में सर्दी समाप्ति की ओर है तो यहां करते हैं लोग बर्फबारी का इंतजार। बर्फ पर अटखेलियां आपको भी लुभाती हैं तो उत्तराखंड के चमोली स्थित औली से मुफीद जगह देश में कहीं और नहीं। हालांकि मौसम अनुकूल न होने की वजह से इस बार यहां अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग रेस का आयोजन टल गया, पर कुदरत के इस नायाब उपहार को निहारने वालों की भीड़ में कोई कमी नहीं आई है। तो फिर आज चलते हैं औली की सैर पर..

टीवी चैनलों, अखबारों में बर्फ से लकदक पहाड़ों के नजारे देखने भर से ही सर्द से सर्द मौसम में भी गर्मजोशी छा जाती है तो जब आप ऐसे स्थलों पर चले जाएं तो क्या होगा? यकीनन ऐसी कल्पनाओं से भी खूबसूरत है औली। एक तरफ पूरी दुनिया जहां कोरिया में विंटर ओलंपिक के रोमांच में डूबी है तो हम भी यह क्यों भूलें कि हमारे देश में भी एक ऐसी जगह है जहां बर्फ पर स्कीइंग का आनंद लेने के लिए दुनिया भर से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। पर केवल सर्दियों के मौसम में ही नहीं बल्कि इसकी सुंदरता कुछ ऐसी है कि पर्यटकों की भीड़ यहां हर मौसम में बनी रहती है। बर्फ की सफेद चादर ओढ़े पहाड़ों पर सूर्योदय हो या सूर्यास्त, औली हर पहर में एक अलग रंग में खूबसूरती बिखेरता नजर आएगा और यह निर्णय करना मुश्किल होगा कि इस सौंदर्य का कौन सा रंग सबसे खूबसूरत है। दिन के वक्त सूर्य की रोशनी से यहां बर्फ से पटे पहाड़ चांदी-सी चमक बिखेरते हैं, तो शाम के समय आप सूरज और चांद को धरती के बिल्कुल पास-पास महसूस करेंगे। आपने पहले भी बर्फबारी का आनंद लिया होगा लेकिन यहां बर्फ इतना अद्भुत है कि आप उसे चख भी सकते हैं। चमोली स्थित हिम क्रीड़ा स्थल को उत्तराखंड का स्वर्ग कहा जाता है। पूरी दुनिया इसे बेहतरीन स्की रिजॉर्ट के रूप में जानती है पर जो केवल कुदरत को करीब से निहारने का जुनून लिए होते हैं उनके लिए औली कुदरत का वरदान है। यहां केवल बर्फ ही नहीं, साथ में है भरपूर चमकती हरियाली. हरे-भरे खेत, छोटे-बड़े देवदार के पेड़ों के बीच ऊंची-नीची चट्टानों पर बिछी मुलायम हरी घास, पतले और घुमावदार रास्ते और जहां तक नजर आए, वहां तक केवल पहाड़ ही दिखते हैं जो इन दिनों चांदी सा चमक बिखेर रहे हैं।
अल्पाइन स्कीइंग का अधिकृत केंद्र
जोशीमठ से 16 किमी. दूर आगे औली उत्तरांचल के ऊपरी भाग में स्थित है। रफ्तार के रोमांच को तैयार था यह इलाका कि बर्फबारी अनूकूल न होने की वजह से इस पर ब्रेक लगाना पड़ा। पर मौसम का मिजाज देखिए कि जब प्रशासन ने इसकी घोषणा कि इसके अगले ही दो दिन बाद जमकर बर्फबारी हो गई यहां। दरअसल, स्कीइंग रेस के बनाई जाने वाली कृत्रिम बर्फ तभी टिकी रह सकती है, जब तापमान पांच डिग्री से ज्यादा न हो। गौरतलब है कि 16 फरवरी से यहां फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीइंग (एफआइएस) रेस का आयोजन होना था। इस स्थल की सबसे खास विशेषता यही है कि उत्तराखंड में स्थित औली ही एकमात्र स्थान है, जिसे एफआइएस ने स्कीइंग रेस के लिए अधिकृत किया हुआ है। वैसे, उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद ही औली में राष्ट्रीय स्तर की स्कीइंग चैंपियनशिप का आयोजन शुरू किया गया पर इसे विशिष्ट पहचान वर्ष 2011 के सैफ विंटर खेलों से मिली। इस दौरान यहां स्कीइंग की कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दरअसल, एफआइएस के मानकों के अनुसार स्कीइंग रेस कराने के लिए केंद्रों में ढलान, बर्फ बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था, विदेशी खिलाडिय़ों को ठहराने की समुचित व्यवस्था, संपर्क मार्ग आदि की स्थिति देखी जाती है। औली इन मानकों पर खरा उतरता है। यहां स्कीइंग के लिए 1300 मीटर लंबा स्की ट्रैक है, जो फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीइंग के मानकों को पूरा करता है।

इससे बेहतर ढलान और कहीं नहीं
औली का मुख्य आकर्षण है यहां बर्फ से लकदक ढलानें। 1640 फीट की गहरी ढलान में स्कीइंग का जो रोमांच यहां है वह दुनिया में दूसरी जगहों पर शायद ही हो। इसलिए औली की ढलानें स्कीयरों के लिए बेहद मुफीद मानी जाती हैं। जाहिर है यहां की ढलानें शिमला (हिमाचल) और गुलमर्ग (कश्मीर) की ढलानों से बेहतर मानी जाती हैं। इसलिए यदि आपने शिमला या गुलमर्ग में ही स्कीइंग का आनंद लिया है तो एक बार यहां आकर स्कीइंग का अनुभव लें, यकीनन औली से प्यार कर बैठेंगे। 2011 में विंटर सैफ गेम्स के बाद तो देश-दुनिया के लोगों औली की बर्फीली ढलानों का आनंद लेने का क्रेज बढ़ गया है। यहां खिलाडिय़ों के लिए स्कीलिफ्ट है, जबकि दर्शकों और निर्णायकों के लिए खास ग्लास हाउस भी बनाया गया है। इस हिमक्रीड़ा केंद्र में उत्तराखंड पर्यटन विभाग और गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से स्कीइंग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। स्कीइंग प्रतियोगिता में सलालम की चर्चा खास होती है। इसमें स्कीयर को बर्फीली ढलान पर तकरीबन 800 फीट की दूरी तय करनी होती है। एक निश्चित दूरी पर पोल लगाए जाते हैं। इनकी संख्या तक 55 से अधिक होती है। प्रतिभागी को दोनों पोल के बीच से होकर गुजरना होता है। इसमें भी गति व समय के आधार पर जीत तय होती है। चमोली के जिलाधिकारी आशीष जोशी के मुताबिक, 'औली और जोशीमठ में मेहमानों के ठहरने की सारी व्यवस्था हो चुकी है। सड़क और रोपवे से औली में आवाजाही सुचारू है। चेयर लिफ्ट भी दुरुस्त की जा चुकी है। औली को बस इंतजार है तो अपने आगंतुकों का।

सामने होगी नंदा देवी!
आप यहां नंदा देवी के अलावा त्रिशूल, द्रोणागिरि, कामेट, नीलकंठ समेत बर्फ से लकदक अन्य चोटियों को जब सामने से देखेंगे तो हर नजारा कैमरे में कैद करने का जी चाहेगा। ये सामने से ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे वे सामने खड़ी हों। शहर की भीड़भाड़-शोरगुल और दूर मंद-मंद ठंडी हवाओं का झोंका आपको ताजा एहसास से भर देगा। ऊंचे-ऊंचे सफेद चमकीले पहाड़ों पर धुंध में लिपटे बादल, मीलों तक जमी बर्फ का प्राकृतिक नजारा आप हमेशा के लिए संजो कर रखना चाहेंगे। यहां पहाड़ सूरज को गले लगाते प्रतीत होते हैं। जब आप स्कीइंग के साथ ही यहां नंदा देवी पर्वत के पीछे से सूर्योदय का नजारा देख लेंगे तो औली किसी ख्वाब-की दुनिया सा प्रतीत होगा। कभी गेहुंआ, केसरिया तो कभी नारंगी तो कभी लाल रंग की अद्भुत चमक का नजारा पेश करता है। यदि आप चांद और सूरज के अनूठे मिलन को देखना चाहते हैं, तो यहां तड़के इसका दीदार कर सकते हैं।
यह है संजीवनी शिखर
औली को औषधीय वनस्पतियों का भंडार भी माना जाता है। इस खूबी के कारण इसे संजीवनी शिखर का भी नाम मिला है। कहते हैं कि रामायण काल में जब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने हिमालय आए तो उन्होंने औली के टीले में रुककर यहां से ही द्रोणागिरि पर्वत को देखा और उन्हें संजीवनी बूटी का दिव्य प्रकाश नजर आया। औली के इसी संजीवनी शिखर पर हनुमानजी का भव्य मंदिर भी है। यहां पर्यटकों की ज्यादा भीड़भाड़ न होने की वजह से और भी आनंद लिया जा सकता है, जहां आप बिना किसी जल्दबाजी या अफरातफरी के इस खूबसूरत जगह को देख सकते हैं। बद्रीनाथ, गोपेश्र्वर, नंदा देवी, नील कंठ, त्रिशूल आदि के रूप में यहां मिथकों और धार्मिक आकर्षणों का खजाना बसता है।

ये रोपवे है खास
एशिया में गुलमर्ग रोपवे को सबसे लंबा माना जाता है, जबकि इसके बाद औली-जोशीमठ रोपवे का नंबर है। करीब 4.15 किलोमीटर लंबे इस रोपवे की आधारशिला 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रखी थी और यह 1994 में बनकर तैयार हुआ। देवदार के जंगलों के बीच से यह रोपवे 10 टॉवरों से गुजरता है। जिग-जैक पद्धति पर बने इस रोपवे में आठ नंबर टॉवर से उतरने-चढ़ने की व्यवस्था है।
ऐतिहासिक परिदृश्य में औली
वर्ष 1942 में गढ़वाल के अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर बर्नेडी औली पहुंचे थे। उन्हें यहां का नैसर्गिक सौंदर्य इस कदर भाया कि सर्दी में दोबारा यहां पहुंच गए। उन्होंने यहां की बर्फीली ढलानों में पहली बार स्कीइंग की। वर्ष 1972 में आइटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट हुकुम सिंह पांगती ने भी कुछ जवानों के साथ औली में स्कीइंग की। आइटीबीपी के अधिकारियों को यहां की बर्फीली ढलानें बेहद पसंद आईं। 25 मार्च, 1978 को यहां भारतीय पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान की स्थापना हुई।

कैमरे में उतार लें स्लीपिंग ब्यूटी
बर्फबारी के बाद जब मौसम खुलता है तो औली की स्लीपिंग ब्यूटी का आकर्षण हर किसी को खींचता है। आखिर क्या है यह स्लीपिंग ब्यूटी, मन में सवाल उठना लाजिमी है। असल में औली के ठीक सामने का पहाड़ बर्फ से ढकने पर लेटी हुई युवती का आकार ले लेता है। इस दृश्य को देखना और कैमरों में कैद करने के लिए होड़ लगी रहती है। इसे ही स्लीपिंग ब्यूटी के नाम से जानते हैं।

चेयरलिफ्ट का रोमांच
सैलानी यहां होने वाली स्कीइंग स्पर्धा और आस-पास के कुदरती नजारों का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं। इसके लिए औली में आठ सौ मीटर लंबी चेयर लिफ्ट की सुविधा भी है, जिसमें बैठकर औली का विहंगम दीदार किया जा सकता है। इस खुली चेयर लिफ्ट से सैर का अलग ही रोमांच है। यही नहीं, स्कीइंग देखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर सात ग्लास हाउस भी बनाए गए हैं, जिनसे औली की खूबसूरत वादियों को निहारा जा सकता है।

ऐसी झील कहीं देखी होगी!
विश्र्वभर में सबसे अधिक ऊंचाई पर कृत्रिम झील औली में स्थित है। 25 हजार किलोलीटर की क्षमता वाली इस झील को वर्ष 2010 में बनाया गया। बर्फबारी न होने पर इसी झील से पानी लेकर औली में कृत्रिम बर्फ बनाई जाती है। इसके लिए फ्रांस में निर्मित मशीनें लगाई गई हैं।

वैष्णों देवी घूमने जा रहे हैं, तो आसपास की इन जगहों पर घूमना न भूलें

ज्यादातर लोग वैष्णो देवी दर्शन को धार्मिक यात्रा मानते हैं। वहीं इस यात्रा को लोग माता के बुलावे से भी जोड़कर देखते हैं। अगर आप अपने किसी परिवारजन के साथ वैष्णो देवी जा रहे हैं और इसके अलावा भी आसपास की जगहों पर घूमना चाहते हैं, तो हम आपको दे रहे हैं बेहतरीन ऑप्शन
पटनी टॉप 
हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों में स्थित पटनी टॉप जम्मू और कश्मीर का सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। उधमपुर जिले में स्थित पटनी टॉप से होकर ही चिनाब नदी गुजरती है।
देवदार और केल के घने जंगलों से ढका पटनी टॉप चारो और नैसर्गिक सुदंरता से भरा पड़ा है। यहां आप हॉर्स राइडिंग और शॉर्ट ट्रेकिंग कर सकते हैं सर्दियों में यह स्थान पूरी तरह बर्फ से ढक जाता है तब यहां स्कीइंग का आनंद भी लिया जा सकता है। पटनी टॉप जम्मू से करीब 112 किलोमीटर दूर है। जम्मू से पटनी टॉप टैक्सी या बस से पहुंच सकते हैं इसमें 3-4 घंटे का समय लगता है। इसका सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उधमपुर है।
कुद 
यह उधमपुर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव है जो जम्मू से करीब 106 किलोमीटर दूर है। यह एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है। सर्दियों में यहां ऊन के मोटे कपड़ों की जरूरत पड़ती है जबकि गर्मियों में हल्के कपड़े काफी होते हैं। यह उधमपुर जिले का पूरी तरह से विकसित हिल स्टेशन है। मॉनसून सीजन में यहां भारी बारिश होती है। यहां ठहरने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। यहां आप टैक्सी या बस से पहुंच सकते हैं जिनके किराए सरकार ने पहले से ही तय किए होते हैं। यहां आप ट्रेकिंग और कैंपिंग कर सकते हैं।

झज्जर कोटली 
कटरा से केवल 15 किलोमीटर दूर स्थित झज्जर कोटली एक लोकप्रिय पिकनिक डेस्टिनेशन है। झज्जर कोटली नेशनल हाइवे 1 पर स्थित है। झज्जर नदी के साफ पानी और इसके किनारे पड़े सफेद पत्थर बेहद आकर्षक लगते हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। यह एकदम शांत और कम भीड़ का इलाका है।

बटोत
जम्मू से 125 किलोमीटर दूर बटोत एक छोटा हिल स्टेशन है जो जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर स्थित है। यह स्थान मुख्य रूप से सेब के बगीचों लिए मशहूर है। यहां आप घने जंगल में कैंपिग कर सकते हैं चिनाब नदी के किनारे कुछ सुकून के पल बिता सकते हैं। यहां ठहरने के लिए कई सेल्फ कंटेंड हट हैं जिन्हे किराए पर लिया जा सकता है इनमें ड्राइंग रूम और बेडरूम के अलावा एलपीजी कनेक्शन के साथ रसोई भी होती है।

विदेश जाने से पहले जान लीजिए पासपोर्ट से जुड़ी खास बातें, जानें कितने तरह के होते हैं पासपोर्ट

सफर में जाने से पहले उससे जुड़ी हुई बातों के बारे में जान लेना चाहिए। जैसे, विदेश जाने से पहले आपको उस देश की थोड़ी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए। इससे आपको वहां घूमने-फिरने में बड़ा मजा आएगा। उसी तरह विदेश जाने के लिए आपको वीजा और पासपोर्ट की जरूरत होती है। आज हम आपको पासपोर्ट से जुड़ी बातों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। एक पर्यटक और एक नागरिक होने के नाते आपको ये जरूरी जानकारी होनी ही चाहिए।
क्या है पासपोर्ट 
पासपोर्ट एक ऐसा दस्तावेज है जो विदेश यात्रा के लिए अनिवार्य है। इसे सरकार जारी करती है। इस दस्तावेज से पता चलता है कि आप किस देश के नागरिक है। साथ ही आपसे जुड़ी कई जानकारियां इसमें लिखी होती है।

पासपोर्ट में दो कैटेगरी इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड (ECR) और इमिग्रेशन चेक नॉट रिक्वायर्ड (ECNR) होती हैं। हर पासपोर्ट बनवाने वाले व्यक्ति को इनके बारे में जानकारी होना चाहिए। आज हम इस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

दो तरह की कैटेगरी 

क्या होता है ECR पासपोर्ट
यदि आप 10वीं पास नहीं हैं तो आपका पासपोर्ट ECR कैटेगरी में आएगा। इस कैटेगरी में आपका पासपोर्ट आता है तो आपको इंडिया से बाहर जाने पर इमिग्रेशन ऑफिसर से क्लियरेंस लेना होगा। ECR कैटेगरी में पासपोर्ट पेज पर स्टाम्प लगा होता है। इसमें क्लियरली लिखा होता है कि इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड।

किन कंट्रीज के लिए लेना होगा क्लियरेंस

सउदी अरब, कुवैत, ओमान, लीबिया, सीरिया, यमन, मलेशिया, इराक, जोर्डन, ब्रुनेई, इंडोनेशिया जैसे कंट्रीज में जाने के लिए आपको इमिग्रेशन ऑफिसर से क्लियरेंस लेना होगा। हालांकि यदि आप जॉब के पर्पस से इन कंट्रीज में नहीं जा रहे तो फिर आपको इमिग्रेशन क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं है।

क्या होता है ECNR पासपोर्ट

यदि आप 10वीं पास हैं तो आप ECNR कैटेगरी में आएंगे। इस कैटेगरी में आने वाले लोगों को इंडिया से बाहर जाते वक्त इमिग्रेशन क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होती।

कैसे चेक करें, आपका पासपोर्ट किस कैटेगरी का है?
यदि आप 10वीं पास हैं तो आपका पासपोर्ट आटोमेटिक ECNR कैटेगरी में ही बनेगा, लेकिन यदि आप पासपोर्ट बनवाते समय यह डिकलेयर करते हैं कि आप 10वीं पास नहीं हैं तो आपका पासपोर्ट ECR कैटेगरी में आएगा। इस कैटेगरी में आने पर आपको पासपोर्ट में स्टाम्प लगा मिलेगा। इसमें इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड लिखा होगा।

नीला पासपोर्ट 
नीले रंग का पासपोर्ट इंडिया के आम नागरिकों के लिए बनाया जाता है। नीला रंग भारतीयों को रिप्रजेंट करता है और इसे ऑफिशियल और डिप्लोमैट्स से अलग रखने के लिए सरकार ने यह अंतर पैदा किया है। इससे कस्टम अधिकारियों या विदेश में पासपोर्ट चेक करने वालों को भी आइडेंटिफिकेशन में आसानी होती है।

सफेद पासपोर्ट 
सफेद रंग का पासपोर्ट गवर्नमेंट ऑफिशियल को रिप्रजेंट करता है। वह शख्स जो सरकारी कामकाज से विदेश यात्रा जाता है उस यह पासपोर्ट जारी किया जाता है।यह ऑफिशियल की आइडेंटिटी के लिए होता है। कस्टम चेकिंग के वक्त उन्हें वैसे ही डील किया जाता है।

मरून पासपोर्ट 
इंडियन डिप्लोमैट्स और सीनियर गवर्नमेंट ऑफिशियल्स(आईपीएस, आईएएस रैंक के लोग) को मरून रंग का पासपोर्ट जारी किया जाता है। हाई क्वालिटी पासपोर्ट के लिए अलग से एप्लिकेशन दी जाती है। इसमें उन्हें विदेशों में एम्बेसी से लेकर यात्रा के दौरान तक कई सुविधाएं दी जाती हैं। साथ ही, देशों में जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा इमिग्रेशन भी सामान्य लोगों की तुलना में काफी जल्दी और आसानी से हो जाता है। 

भारत के अलावा इन देशों में भी है ताजमहल, जानें कितने अलग हैं हमारे ताज से

आपने आगरा का ताजमहल तो जरूर देखा होगा या अगर आप वहां नहीं गए तो कम से कम आपने आगरा के ताजमहल के बारे सुना तो होगा ही। हमारे देश के ताजमहल के अलावा और भी देश हैं, जहां पर ताजमहल हैं।

बांग्लादेश
आगरा का ताजमहल अपनी खूबसूरती के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है पर आपको जानकर हैरानी होगी कि पड़ोसी मुल्कि बांग्लादेश में भी ताजमहल है। इसे राजधानी ढाका में बनाया गया है। बांग्लादेशी फिल्म मेकर हसनउल्ला मौनी ने 2008 में बनवाया था। मौनी ने बताया कि साल 1980 में जब वो आगरा गए तो ताजमहल को देखकर मंत्रमुग्धन हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने देश में भी ताजमहल की कॉपी बनाने की ठान ली थी।
यूके
यूके में बनी रॉयल पवेलियन इमारत बनने की शुरुआत 1787 में शुरु हुई थी। ये जगह प्रिंस ऑफ वेल के लिए तैयार करवाया गया था। इसे ब्रिंग्हरटन पवेलियन के नाम से भी जाना जाता है। इस इमारत को दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल की तर्ज पर बनाया गया है। इस महल को बनाने में कई साल का समय लगा लेकिन ताज की इस कॉपी को बनवाकर ही दम लिया।

दुबई
दुबई में ताज अरबिया नाम की एक इमारत को ताजमहल का लुक दिया गया है। ये एक 20 मंजिला कांच की इमारत है जिसमे 350 कमरे हैं। जनता के लिए इस इमारत को 2017 में खोल दिया जाएगा। सभी क्लियरेंस हासिल करने के बाद ताज अरबिया अब लोगों का स्वांगत करने के लिए तैयार है। यहां मुगल गार्डन भी बनाया गया है। इस ताज महल में मल्टी  कुजीन रेस्टोयरेंट और नाइट क्ल्ब हैं।
चीन
ताजमहल सिर्फ भारत में ही नहीं विश्वम के अन्य हिस्सों में बसा रहेगा। चीन खुद को दुनिया के सामने एक अलग अंदाज में पेश करता है इसलिए चीन ने अपने यहां ताजमहल ही बना डाला। शेनझेन के एक थीम पार्क में ताजमहल का प्ररूप तैयार किया है। चीन इसे विश्वक की खिड़की नाम दिया गया है। सफेद माबर्ल से इसे तैयार किया गया है।

जन्नत जैसी खूबसूरत है फ्रांस की ये 5 जगह, प्रकृति के करीब जाने के लिए यहां घूमें

आप किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां आपको रोज की भीड़-भाड़ से आजादी मिल सके। साथ ही आपको प्रकृति के करीब जाने का मौका मिले, तो आप फ्रांस की बेहतरीन 5 जगहों पर घूम सकते हैं। यहां घूमकर आपको न सिर्फ मजा आएगा बल्कि काफी कुछ नया सीखने को भी मिलेगा।
लाइबेरॉन
स्वर्ग की तरह मानी जाने वाली जगह है लाइबेरॉन। इस जगह के जंगल, लैवेंडर के खेत, किसानों के बाजार, कलरफूल और कलात्मक घर यहां पर घूमने वालों के आकर्षण का केंद्र हैं। इस जगह को देखने के लिए ज्यादातर लोग गर्मियों में पहुंचते हैं।
पेरिस
फ्रांस की राजधानी पेरिस देखने में बहुत ही खूबसूरत बेस्ट डेस्टिनेशन्स है। इसे सिटी ऑफ लव, सिटी ऑफ लाइट्स, कैपिटल ऑफ फैशन नाम दिए गए हैं। इस शहर में  विश्व प्रसिद्ध संग्रहालय भी हैं। यहां हर साल दुनियाभर के कपल्स हनीमून मनाने पहुंचते हैं। इस शहर में देखने वाली ट्रायोमफे, नॉट्रे डेम कैथेड्रल, एफिल टॉवर, आर्क डी आदि खास जगहें हैं।
दॉरदॉग्ने
यह जगह फ्रांस के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यहां पर नेचुरल दृश्य देखने को मिलता है और यहां पर दॉरडोन नदी भी है। इस जगह पर चैटाऊ डी बायनाक नाम की एक पहाड़ी भी है जो काफी खूबसूरत है।
मॉन्ट सेंट-मिशेल
मॉन्ट सेंट-मिशेल एक द्वीप की तरह है। इसका निर्माण 708 ईस्वी में एवरेश के बिशप और मोन्क्स ने करवाया था। यह फ्रांस के नॉर्थेंडी के उत्तर-पश्चिमी में स्थित है। यह फ्रांस घूमने के शौकीन लोगों के लिए मनपसंद जगहों में से एक है।
फ्रेंच रिवेरा
फ्रेंच रिवेरा फ्रांस के भूमध्य सागर के तट पर स्थित है। फ्रांस जाने वाले सभी पर्यटक यहां जरूर पहुंचते हैं। यहां पर बहुत बड़ा प्ले ग्राउंड है। यह जगह मोनाको या कान फिल्म फेस्टीवल, सेंट ट्रोपेज के लिए काफी मशहूर है।इसके अलावा यहां पर एजे और सेंट-पॉल डे वेंस के गढ़े गांव और ग्रास के पेर्फियमस बेहद मशहूर है।

खूबसूरती के मामले में किसी से कम नहीं हिमाचल का त्रियुंड हिलस्टेशन, जानें क्या है स्पेशल

पहाड़ों को नहलाती सूर्य देव की किरणें और भोर के आगमन पर सोने-सी दमकती कांगड़ा घाटी। यहां रोमांच से लेकर धार्मिक और धरोहर के दर्शन हर स्थान पर होते हैं। यहां ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए कई रूट हैं। इनमें शामिल हैं कांगड़ा का त्रियुंड, लाका और इंद्रहार दर्रा। एक रत्‍‌न की तरह धर्मशाला के मुकुट पर चमकता त्रियुंड पर्यटकों को खूब आकर्षित करने लगा है।
नौ किमी. की तीखी चढ़ाई
मैक्लोडगंज से लगभग नौ किमी. की तीखी चढ़ाई और दुर्गम रास्तों से होकर यहां पहुंचा जा सकता है। विदेशी सैलानियों का भी यह पसंदीदा स्थल है। 2828 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड में धौलाधार पर्वत श्रंृखला के बेहद नजदीक से दीदार होते हैं। त्रियुंड से खूबसूरत कांगड़ा घाटी को निहारा जा सकता है।

तीन महीने त्रियुंड जाना जोखिम भरा
त्रियुंड एक ऐसा ट्रैक माना जाता है, जहां लगभग पूरे साल ट्रैकिंग के शौकीन पहुंचते हैं। दिसबंर से फरवरी तक यहां बर्फबारी होने के कारण जाना जोखिम भरा होता है। हिमपात वाले महीनों को छोड़कर साल में कभी भी त्रियुंड की राह पकड़ सकते हैं।
इंद्रहार की राह भी रोमांचक
त्रियुंड से आगे पर्यटक इंद्रहार ग्लेशियर तक पहुंच सकते हैं। इसके लिए त्रियुंड से सुबह आगे का ट्रैक शुरू होता है। त्रियुंड से पांच किमी. आगे ल्हेस केव आता है। यहां चार घंटे के बाद पहुंचा जा सकता है। आप दूसरे दिन यहां रुकें। यहां अगले दिन इंद्रहार ग्लेशियर के लिए ट्रैकिंग शुरू करें। करीब 6-7 घंटे का पैदल सफर तय कर इंद्रहार पहुंच सकते हैं। इस पूरे ट्रैक को बिना किसी पंजीकृत गाइड या ट्रैवल एजेंसी के न करें।

यह स्थल भी हैं दर्शनीय
त्रियुंड से लौटकर आप कुछ दिन मैक्लोडगंज में भी बिता सकते हैं। यहां मैक्लोडगंज मार्केट, दलाईलामा टेंपल, भागसूनाग, भागसूनाग वॉटरफॉल, धर्मकोट दर्शनीय स्थल है। इसके अलावा नड्डी से धौलाधार का नजारा, यहां की डल झील व मैक्लोडगंज के समीप सेंट जोन चर्च भी दर्शनीय स्थल हैं।

कैसे पहुंचें
त्रियुंड धर्मशाला का एक हिस्सा है। यह मैक्लोडगंज से करीब नौ किमी. आगे पहाड़ी में है। त्रियुंड जाने के लिए मैक्लोडगंज से पैदल या फिर धर्मकोट होते हुए गलू नामक स्थान तक टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं। इससे आगे पैदल सफर शुरू कर सकते हैं। कांगड़ा हवाई अड्डे तक दिल्ली से नियमित तीन हवाई उड़ानें हैं। कांगड़ा एयरपोर्ट धर्मशाला से 10 किमी. दूर गगल में है। गगल से टैक्सी या बस से धर्मशाला पहुंच सकते हैं। धर्मशाला से आपको मैक्लोडगंज पहुंचना होगा। मैक्लोडगंज के लिए धर्मशाला बस स्टैंड से टैक्सी, जीप या बसों के माध्यम से पहुंच सकते हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू व मनाली से धर्मशाला के लिए नियमित सामान्य व वॉल्वो बस सेवा उपलब्ध है। धर्मशाला का नजदीकी ब्राडगेज रेलमार्ग पठानकोट है। जहां से बस या टैक्सी से धर्मशाला पहुंच सकते हैं।
बरतें सावधानियां

  • त्रियुंड जंगल व पहाड़ी के टॉप में हैं। रास्ते बेहद कठिन हैं। ऐसे में त्रियुंड जाते समय गलू में पुलिस पोस्ट में पंजीकरण जरूर करवाएं।
  • त्रियुंड जाने के लिए पंजीकृत गाइड की सेवाएं जरूर लें। बिना गाइड के जा रहे हैं, तो मुख्य रास्ते से इधर-उधर न जाएं।
  • त्रियुंड में रहने की व्यवस्था पहले करा लें। यहां रात को मौसम बेहद ठंडा होता है। बिना बुकिंग के परेशान होना पड़ सकता है।
  • बारिश व बर्फबारी के दौरान त्रियुंड में धुंध व बादल होते हैं। रास्ता भटक गए हैं और अंधेरा हो रहा है, तो घबराए नहीं। आप सुरक्षित ठिकाना ढूंढ लें और पुलिस की मदद लें।
  • त्रियुंड की पहा़डि़यों में भालू व तेंदुआ भी पाया जाता है। ऐसे में अकेले कहीं भी जंगल की तरफ न जाएं।

रात ठहरने के लिए व्यवस्था
त्रियुंड में वन विभाग का विश्राम गृह है। उसकी बुकिंग वन विभाग धर्मशाला कार्यालय से बुकिंग करवाई जा सकती है। यहां निजी गेस्ट हाउस व टेंट की भी व्यवस्था है। इसके लिए मैक्लोडगंज व भागसूनाग में ऑनलाइन बुकिंग होती है।
खाने में मिलते हैं दाल-चावल, मैगी
त्रियुंड में कुछ अस्थायी दुकानें हैं। जहां आपको दाल व चावल मिल सकते हैं। इसके अलावा, मैगी व चाय का भी लुत्फ ले सकते हैं। वहां टेंट या गेस्ट हाउस में पसंद का भी आर्डर बुकिंग के दौरान दे सकते हैं।

विशाखापट्टनम घूमने जाएं तो जरूर घूमें तो कैलाशगिरि, नेचर के साथ लीजिए स्ट्रीट फूड का मजा

अगर आपको विशाखापट्टनम का सबसे खूबसूरत व्यू देखना है तो कैलासगिरि जरूर जाएं। कोशिश करें कि यहां या तो सुबह के समय जाएं या फिर शाम को। कैलासगिरि एक छोटी सी पहाड़ी का नाम है जिस पर एक खूबसूरत पार्क बना है। इस पार्क की चोटी पर शिव-पार्वती की धवल प्रतिमा आपका स्वागत करती है। पहाड़ी से एक दिशा में विशाखापट्टनम का विहंगम दृश्य नजर आता है। चारों और हरियाली और ऊपर साफ नीला आकाश देखने लायक दृश्य बनता है। कैलासगिरि तक केबल कार द्वारा भी जाया जा सकता है। 90 रुपये खर्च कर इस रोपवे का आनंद उठा सकते हैं। पहाड़ी पर ही चिल्ड्रेन पार्क, टाइटैनिक व्यूप्वाइंट, फूलघड़ी, टेलीस्कोपिक प्वाइंट भी हैं। यहां बच्चों के लिए एक टॉय ट्रेन भी मौजूद है। जब आप बोटिंग करने समुद्र में जाएंगे तो वहां से भी कैलासगिरी नजर आता है। दूर से ही पहाड़ी पर सफेद अक्षरों में लिखा कैलासगिरि सुंदर लगता है। यहां से बंगाल की खाड़ी का दृश्य बहुत खूबसूरत नजर आता है।
डॉल्फिन नोज पहाड़ी
अगर आप रामकृष्ण बीच पर खड़े हैं तो आपके दाईं ओर छितिज पर एक अनोखी संरचना दिखाई देगी। यह एक गोलाकार पहाड़ी है, जिसे डॉल्फिन नोज कहा जाता है। इसकी ऊंचाई 350 मीटर है। आजादी से पहले ब्रिटिश आर्मी इस ऊंचे स्थान का उपयोग पूरे बंदरगाह और शहर पर निगरानी करने के लिए करती थी। यहां एक लाइटहाउस, चर्च, मजार और मंदिर भी मौजूद है।

सिंहाचलम मंदिर
यह भगवान विष्णु को समर्पित एक भव्य मंदिर है, जो विशाखापट्टनम से करीब 20 किलोमीटर दूर हरे-भरे सिंहाचलम पर्वत की चोटी पर बना है। हर वर्ष जून-जुलाई माह में हजारों श्रद्धालु सिंहाचलम पर्वत की 34 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करते हैं। मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है। यहां हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद की पौराणिक कहानी मूर्ति स्वरूप में दर्शाई गई है। मंदिर का मुख पश्चिम की ओर है। इसके केंद्रीय भाग को कलिंग वास्तुकला शैली के अनुसार बनाया गया है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण इस मंदिर का नाम सिंहाचलम पड़ा है। यह भगवान नरसिंह के भारत में स्थित 18 'नरसिंह क्षेत्रों' में से एक माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता बेहद सुहावना है।

यहां बसी है शहर की आत्मा
कहते हैं विशाखापट्टनम की आत्मा उसकी तीन पहाडि़यों में निहित है। इन तीन पहाडि़यों की सबसे ऊंची चोटी को रॉस हिल कहा जाता है, जहां 'मदर मेरी' नाम का सफेद रंग का एक खूबसूरत चर्च है। यह वर्ष 1864 में बना था। दूसरी चोटी पर बाबा इश्क मदीना की दरगाह है और तीसरी पर भगवान वेंकटेश्र्वर का मंदिर। ये तीनों पहाडि़यां विशाखापट्टनम के लोगों के बीच के सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक हैं।

पसिरेड्डु और केले के पकौड़े
विशाखापट्टनम का खाना अपने तेल और तीखे मसालों के लिए जाना जाता है। पूरे आंध्र प्रदेश के खानों में मिर्ची का अहम रोल होता है। पसिरेड्डु यहां की मशहूर डिश है, जिसे लोग नाश्ते में खाना पसंद करते हैं। मूंग की दाल से बना यह व्यंजन नारियल और टमाटर की चटनी के साथ खाया जाता है। ऋषिकोंडा पहाड़ी के पास एक छोटा सा रेस्टोरेंट है, जिसे राजू और उनकी पत्नी चलाते हैं। यह सी फूड के लिए बहुत मशहूर है। यहां का मटन करी, फ्राई फिश और प्रॉन्स मसाला जरूर चखें। विशाखापट्टनम का खाना मसालों से भरपूर होता है। रामकृष्ण बीच पर शाम  का मजा जरूर लें। यहां पर भुट्टे, चाट, पानीपुरी, मूड़ी, कच्चा आम मसालेदार आदि जरूर ट्राई करें। यहां मिर्ची और केले के पकौड़े भी बहुत स्वादिष्ट मिलते हैं। डिनर में मटन गोंगुरा जरूर ट्राई करें। यहां की दम बिरयानी भी बहुत मशहूर है।

पहाड़, झरने और वाइल्ड सेंचुरी का मजा एक ही जगह लेना चाहते हैं, तो मैसूर की इन जगहों पर जरूर घूमें

मैसूर से 85 किमी की दूरी पर बेंगलुरु से 170 किमी दूर एक ऊंची पहाड़ी श्रृंखला है।
हम में से ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं, जो अपनी एक ट्रिप पर ज्यादा जगहों पर घूमना चाहते हैं। ये सोचकर लोग ऐसे शहर में जाना पसंद करते हैं, जहां पर घूमने-फिरने की ज्यादा से ज्यादा जगह हो। आइए, हम आपको ऐसे ही शहर के बारे में बताते हैं, जहां की 5 खूबसूरत जगहों पर घूमकर आपका मूड फ्रेश हो जाएगा।
कबीनी वाइल्ड लाइफ सेंचुरी
कबीनी वन्यजीव अभयारण्य मैसूर-मनंथवाड़ी रोड से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। आप यहां नवम्बर से दिसम्बर में घूम सकते हैं। आपको यहां झील के आस-पास कई वन्य जीवों को देख सकते हैं। 
केआरएस बांध 
वृन्दावन गार्डन के ऊपर स्थित कृष्ण राजा सागर बांध मैसूर के पास एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। केआरएस बांध के नाम से मशहूर ये बांध भारत का सबसे पहला सिंचाई का बांध है मैसूर के महल की यात्रा करने वाले टूरिस्ट केआरएस बांध भी जरूर घूमते हैं।
श्रीरंगपटना
मैसूर से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित श्रीरंगपटना एक शानदार शहर है जो कि कावेरी नदी से घिरा होने के कारण और भी खूबसूरत लगता है। इस शहर का नाम रंगनाथस्वामी मंदिर के नाम पर रखा गया है। 9वी सदी में गंगा राजवंश द्वारा बनाया गया श्रीरंगपटना दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण वैष्णव तीर्थस्थलों में से एक है। 
बीआर हिल्स
मैसूर से 85 किमी की दूरी पर बेंगलुरु से 170 किमी दूर एक ऊंची पहाड़ी श्रृंखला है, जो बीआर हिल्स के नाम से मशहूर है। बिलिगिरी रंगा पर्वत कर्नाटक के चामराजनगर जिले में है, जो भारत की खूबसूरत जगहों में से एक है।बीआर हिल्स बिलीगिरी रंगास्वामी मंदिर वन्यजीव अभयारण्य के लिए मशहूर है।

बांदीपुर नेशनल पार्क
बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान मैसूर से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह उद्यान कर्नाटक की सीमा पर स्थित चामराजनगर जिले में स्थित है और अपने असंख्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान 874 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है जिसमें पशुओं और वनस्पतियों की कई प्रजातियां हैं।  

दुनिया का सबसे खुशहाल देश है फिनलैंड, जिंदगी में एक बार तो जरूर घूमें यहां - Hinditipszone.com

संयुक्त राष्ट्र के हैप्पी इंडैक्स में फिनलैंड पहले नंबर पर था. जबकि भारत 122वें नम्बर से 133वें रहा। भारत से खुश रहने के मामले में गरीब देश पाकिस्तान, नेपाल, बंग्लादेश और भूटान भी आगे हैं। वहीं अगर आप एडवेंचर्स स्पोर्ट्स के शौकीन हैं तो आपको ऐसी जगह जाना चाहिए जहां पर सैर-सपाटे के साथ गेम्स का मजा भी ले सकें। ऐसी जगह है फिनलैंड। जो छोटा-सा देश है, लेकिन ट्रैवल के लिहाज से यहां बहुत कुछ है। आइए, जानते हैं खास बातें। 
लगभग 2 लाख झीलों का देश 

फिनलैंड नीला देश, झीलों का शहर, फिनलैंड में लगभग 2 लाख झील हैं। यहां लोग अपनी भाषा में फिनलैंड को ' सौमी फिनलैंड ' कहते हैं। हैल्सिलन्की फिनलैंड की राजधानी है, जिसे ब्लू सिटी भी कहा जाता है। यहां से बस, मेट्रो ट्रेन, ट्राम एवं ट्रेन आदि चलती है. बस की यात्रा करने पर ढाई यूरो टिकट लगता है जबकि मेट्रो और ट्राम ट्रेन की टिकट दो यूरो है।
सोना बाथ से फ्रेश होते हैं टूरिस्ट
सोना बाथ फिनलैंड में बहुत ही मशहूर है। ये एक तरह का स्नान होता है, जिसमें एक कमरे में एक बड़ा-सा पत्थर होता है। इस पत्थर को लाल हो जाने तक गर्म किया जाता है। गर्म हो जाने के बाद इस पर पानी डाला जाता है। पानी डालने पर निकलने वाली भाप से लोग नहाते हैं। इस तरह का स्नाैन सप्ताह में एक बार किया जाता है। इसी को सोना बाथ कहा जाता है।
ऐसे एडवेंचर स्पोर्ट्स जो आपने सुने भी नहीं होंगे 
यहां पर दुनिया के सभी ट्रेवल स्पोर्ट्स का मजा लिया जा सकता है। यहां ट्रेकिंग, आइस हॉकी, आइस जपिंग, साईकिलिंग, बॉक्सिंग, वाटर रेस जैसे खेलों का लुत्फ लिया जा सकता है। साथ ही यहां पर वा‍इफ केयरिंग कॉन्टेास्ट  बहुत मशहूर है। इस खेल में पति अपनी पत्नी को गोद में उठाकर दौड़ लगाता है। जो इस दौड़ मे जीतता है, उसे अपनी पत्नी के वजन का टेडी बियर दिया जाता है।
कैसे पहुंचे : इंटरनेशल फ्लाइट नई दिल्ली, गोवा, बैंगलोर से मिल जाएगी। उससे पहले आपको पासपोर्ट और वीजा अप्लाई करना पड़ेगा। 

घूमने के लिए बेस्ट टाइम : आप दिसम्बर से मार्च के बीच यहां घूम सकते हैं। 

क्या है खास : यहां झील, बोटिंग, एडवेंचर्स गेम्स के साथ हर चीज खास है। 

दिल्ली से 45 किलोमीटर दूर है सुल्तानपुर नेशनल पार्क, नेचर और बर्ड्स फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट लोकेशन

टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी पर इस कदर हावी हो चुकी है कि हमारा पूरा दिन टेक्नोलॉजी के साथ बीत जाता है।ऐसे हमारी प्रकृति से दूरी बढ़ती जा रही है। आलम ये है कि घरों की छतों पर मोर देखना अनोखी-सी बात लगती है। अगर आप भी कुछ वक्त प्रकृति के पास बिताना चाहते हैं, तो इस वीकेंड सुल्तानपुर नेशनल पार्क घूम सकते हैं। इसका नाम पहले सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी था।
 आइए, जानते हैं क्या है खास.

1972 में बना वाटर बर्ड रिर्जव
सुल्तानपुर नेशनल पार्क दिल्ली से 45 किमी दक्षिण-पश्चिम में तथा गुड़गांव से 15 किमी की दूरी पर स्थित है।अनेकानेक प्रकार के पक्षी, घने पेड़ों व झीलों से सजा यह नेशनल पार्क 'हरियाली के स्वर्ग' के समान है। यहां आकर आपके मन को एक सुकून का अनुभव होता है। सुल्तानपुर को सन् 1972 में 'वाटर बर्ड रिर्जव' के रूप में घोषित किया गया था।

यह नेशनल पार्क प्रवासी पक्षियों की आरामगाह के रूप में जाना जाता है। सितम्बर माह से यहां तरह-तरह के प्रवासी पक्षियों का आगमन प्रारंभ हो जाता है। एक जानकारी के मुताबिक यहां 1800 पक्षियों की प्रजातियां है।पार्क के सुंदर नजारे व विविध प्रकार के पक्षियों को निहारने के लिए यहां कई सारे वॉच टावर बनाए गए हैं, जहां से आप पार्क की खूबसूरती व इन पक्षियों के कार्यकलापों को करीब से देखने व जानने का लुत्फ उठा सकते हैं।

कैसे पहुंचे 
दिल्ली से गुडगांव (हरियाणा) जाने के लिए आप मेट्रो या अपने निजी वाहन से जा सकते हैं। आप देश के किसी और हिस्सों से आ रहे हैं, तो आपको अपने राज्य से करीब पड़ने वाले राज्य दिल्ली या हरियाणा में आना पड़ेगा।

घूमने के लिए बेस्ट टाइम : आप दिसम्बर से जनवरी के बीच यहां घूम सकते हैं।

समय : आप सुबह 7 बजे से 4:30 बजे तक एंट्री कर सकते हैं।

टिकट : बच्चों और बड़ों के लिए 5 रुपए की टिकट रखी गई है।

क्या है खास : आपको किंगफिशर, ग्रे पेलिकेन्स, कार्मोरेंटस, स्पूनबिल्स, पोंड हेरोंस, व्हाइट इबिस आदि पक्षी भी देखने को मिल जाएंगे। इसके अलावा नीलगाय भी खास है।

Thursday, 14 June 2018

कम पैसों में घूमना है शिमला-मनाली तो ऐसे करें प्लानिंग खर्चा कम होगा

अक्सर हम घूमने का प्लान बनाते हैं। अपने शहर से कहीं दूर नदी-पहाड़ वाली जगहों पर परिवार से साथ छुट्टियां मनाने की सोचकर ही खुश हो जाते हैं। लेकिन जब इस टूर में खर्च होने वाले पैसों का ख्याल आता है तो मजबूरन प्लान कैंसिल करना पड़ता है।
शिमला-मनाली या फिर ऐसे ही किसी हिल स्टेशन घूमने का प्लान कर रहे हैं तो सबसे पहले इस बात का ख्याल रखें कि सारी तैयारी पहले से ही कर लें। अचानक मूड बना और घूमने निकले तो जाहिर है 100 की जगह 200 खर्च होंगे। इसलिए पहले से प्लानिंग करें।
टूर प्लान करने के लिए ऑफ सीजन का समय रखें तो बेहतर। ऑफ सीजन में आपको हर सुविधा की कम कीमत चुकानी पड़ेगी, जो पीक सीजन में होती है। ऑफ सीजन में भीड़ कम रहने पर आप छुट्टी और ज्यादा एंज्वॉय कर सकेंगे।
होटल के लिए तमाम वेबसाइट्स हैं जहां से आप होटल पहले से बुक कर सकते हैं। होटल बुक करते समय होटल रिव्यू को ध्यान से पढ़ना ना भूलें। समय-समय पर होटलों में भी बंपर ऑफर दिए जाते हैं।
होटल बुक करते समय चेक इन और चेक आउट का भी ख्याल रखें। दो-तीन घंटे के लिए 1 दिन का किराया देना बहुत अखरेगा।
जहां घूमने का प्लान बना रहे हैं, उसके बारे में पहले से कुछ जानकारी जुटा लें। मसलन वहां घूमने लायक और कौन-कौन सी जगह हैं। ये कितनी दूर है। थोड़ी जानकारी रहेगी तो टूरिस्ट प्लेस में आपको कोई ठग नहीं सकता।
जिस जगह जा रहे, वहां घूमने के लिए टैक्सी हायर करना बेहतर होगा या नहीं, इसका भी पता कर लें। होटल से टूरिस्ट प्लेस कितनी दूर है, वहां जाने का और क्या साधन है, यह सब पता कर लें। टैक्सी की जगह अब बाइक-स्कूटी भी किराए पर दी जाने लगी है। वो भी हायर कर सकते हैं। अक्सर लोग 3-4 दिन के लिए घूमने जाते हैं तो पूरे समय के लिए टैक्सी बुक कर लेते हैं। पूरे समय की बजाय टैक्सी हर दिन जरूरत के हिसाब से हायर करेंगे तो फायदा होगा। आपका कोई दोस्त पहले वो जगह घूम चुका हो तो उनसे जरूर कुछ टिप्स ले लें, काम आएंगे।

तमाम एयरलाइंस ऑफ सीजन में विशेष छूट भी देती हैं। इससे कम दाम में आप हवाई सफर करते हुए बिना थके फौरन घूमने वाली जगह पहुंच जाएंगे।
टूरिस्ट प्लेस की लोकल मार्केट की भी जानकारी कर लें तो बेहतर होगा। लोकल मार्केट से उस जगह का प्रसिद्ध सामान खरीदेंगे तो जाहिर है उसका दाम भी किफायती ही होगा।

इस गर्मी में करें पहाड़ों की सैर, ये हैं भारत के 10 बेस्ट हिल स्टेशन

गर्मी का मौसम है और जल्द ही बच्चों की छुट्टियां भी पड़ जांएगी, ऐसे मौके पर आप बदन जलाती गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ों का रुख कर सकते हैं. वैसे भी आजकल की चिलचिलाती धूप में आप एसी से बाहर तो निकल नहीं सकते हैं, तो बेहतर है अपना बैग पैककर किसी हिल स्टेशन पर निकल जाएं.
अब अगर आप ये फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सी जगह आपके घूमने के लिए सही रहेगी, तो हम आपकी समस्या का समाधान कर देते हैं. हम आपको बता रहे हैं भारत के उन 10 बेहतरीन हिल स्टेशनों के बारे में, जहां जाकर आप जमकर मस्ती कर सकते हैं.

1. कश्मीर
दिल्ली से करीब 800 किलोमीटर दूर कश्मीर गर्मी के मौसम में छुट्टी मनाने के लिए बेहतरीन जगह है. श्रीनगर की खूबसूरती हमेशा से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है. पहाड़, गार्डन और डल लेक पर खड़े हाउसबोट इतने बेहतरीन हैं कि आप एक बार यहां चले जाएं तो बार-बार जाने का दिल करेगा.
कश्मीर जाने के लिए ट्रेन, फ्लाइट या सड़क मार्ग, आपके पास तीनों ऑप्शन मौजूद हैं. इसके अलावा वहां ठहरने के लिए फाइव स्टार होटल से लेकर कई बजट होटल भी आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे.

2. मनाली
पहाड़ों के बीच में बसा मनाली अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. हर साल लाखों सैलानी यहां आते हैं. दिल्ली से मनाली की दूरी 600 किलोमीटर है. दिल्ली, शिमला और चंडीगढ़ से मनाली के लिए हिमाचल परिवहन निगम की बसें चलती हैं. साधारण किराया 480 रुपए, डीलक्स बस का किराया 850 रुपए है.

इसके अलावा आपको अपने बजट के हिसाब से होटल भी मिल जाएंगे. अगर आप लग्जरी होटल में रहना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको 5 से 15 हजार रुपए तक एक दिन के चुकाने होंगे. अगर आप सस्ते होटल में रहना चाहते हैं तो आपको यहां हजार रुपए तक के बजट में भी आसानी से होटल मिल जाएंगे. मनाली जाने का सबसे अच्छा समय मार्च से सितंबर होता है. यहां आप स्कीइंग, ट्रैकिंग और राफ्टिंग का मजा ले सकते हैं. मनाली से थोड़ी दूरी पर बसा रोहतांग पास पर्यटकों को काफी लुभाता है.

3. शिमला
दिल्ली से शिमला के लिए हवाई यात्रा की भी सुविधा है. रेल मार्ग से जाना चाहें तो नैरोगेज लाइन कालका से शिमला तक जाती है. यहां पहुंचने के लिए दो तरह की टॉय ट्रेन का मजा भी लिया जा सकता है.
ठहरने के लिए 7 स्टार होटल से लेकर सस्ते होटल और गेस्ट हाउसों के साथ निजी गेस्ट हाउस भारी संख्या में हैं. वैसे आप किसी ट्रैवल कंपनी से पैकेज भी ले सकते हैं जो आपको 10 हजार रुपए तक मिल जाएंगे.

4. नैनीताल
नैनीताल तीन ओर से घने पेड़ों की छाया में ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच समुद्रतल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. नैनीताल अपनी झीलों के लिए मशहूर है. कहा जाता है कि एक वक्त यहां 60 से ज्यादा झीलें हुआ करती थीं. यहां चारों ओर खूबसूरती बिखरी है. सैर-सपाटे के लिए कई जगह हैं.
नैनीताल का नजदीकी रेलवे स्टेशन यहां से सिर्फ 34 किमी दूर काठगोदाम में है. काठगोदाम से नैनीताल के लिए राज्य परिवहन की गाड़ियां दिन में हर समय उपलब्ध रहती हैं. इसके अलावा आप प्राइवेट टैक्सी भी बुक कर सकते हैं. ठहरने के लिए यहां होटल हर बजट में मौजूद हैं. अगर आप कोई टूर पैकेज लेते हैं तो वो आपको 6500 रुपए में आराम से मिल जाएगा.

5. मसूरी
उत्तराखंड में बसे मसूरी को पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है. मसूरी का कैंप्टी फॉल, लेक मिस्ट, संतरा देवी मंदिर, म्युनिसिपल गार्डन, चाइल्डर्स लॉज, गन हिल, मसूरी झील, मशहूर हैं. मसूरी भारत के कई शहरों के सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. यूपी राज्य परिवहन, सेमी लग्‍जरी, लग्‍जरी बसें मसूरी तक उपलब्ध हैं.
इसके अलावा अगर आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून में है, जो यहां से 32 किलोमीटर की दूरी पर है. इसके अलावा यहां हर क्लास के होटल मिल जाएंगे. अगर आप सस्ते होटल में ठहरना चाहते हैं तो आपको 800 रुपए में भी कमरा मिल जाएगा.

6. दार्जलिंग
दार्जलिंग पश्चिम बंगाल में बसा बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है. पुराने और नए भवन का मेल इस शहर को सुंदर बनाता है. दार्जलिंग की चाय और टॉय ट्रेन काफी फेमस है. टॉय ट्रेन से आप पूरे दार्जलिंग के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठा सकते हैं.
दार्जलिंग पश्चिम बंगाल के प्रमुख हिस्सों से जुड़ा हुआ है. अगर आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट बागडोगरा है, यहां से दार्जलिंग 68 किलोमीटर है. वहां जाने के लिए आपको टैक्सी लेकर जाना होगा. अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आपको जलपाईगुड़ी जाना पड़ेगा, वहां से आप टॉय ट्रेन से दार्जिलिंग जा सकते हैं.

7. शिलाॉन्ग
मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. इसकी खूबसूरती के कारण भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है. शिलाॉन्ग में पूरी दुनिया का सबसे ऊंचा वॉटरफॉल है, जिसे देखने दुनियाभर से लोग आते हैं. शिलांग से 35 किलोमीटर दूर अमरोही एयरपोर्ट है, वहां से आप प्राइवेट टैक्सी बुक कर शिलांग जा सकते हैं.

8. मुन्नार
मुन्नार भारत के फेमस हिल स्टेशनों में से एक है, यहां के चाय बागान भारत में सबसे ऊंचाई पर स्थित चाय बागान हैं. कहा जाता है कि यहां भारत की सबसे जायकेदार चाय का उत्पादन होता है. शोर-शराबे से दूर इस शहर में जाकर आपको काफी सुकून मिलेगा. मुन्नार पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन तेनी है, जो यहां से लगभग 60 किमी दूर है जबकि चेंगनचेरी, लगभग 93 किमी दूर है.
अगर आप फ्लाइट से जाना चाहते हैं तो मदुरई जाना होगा जो करीब 140 किमी दूर है. अगर आप कोई टूर पैकेज लेते हैं तो आपको तीन दिन के लिए 15 हजार तक देने होंगे.

9. कुर्ग
कुर्ग कर्नाटक में बसा है, यहां के पहाड़, हरे भरे वन बहुत आकर्षक हैं. मैसूर से 120 किलोमीटर दूर स्थित कुर्ग को कोडागू भी कहा जाता है. ये चाय और कॉफी के लिए फेमस है. इसके अलावा शहद, अंजीर, मसाले, इलायची, काली मिर्च और सिल्क साड़ियां भी काफी मशहूर हैं. यहां से नजदीकी एयरपोर्ट मैंगलोर का है जो 135 किलोमीटर दूर है वहीं बेंगलुरु एयरपोर्ट 250 किलोमीटर है. नजदीकी रेलवे स्टेशन मैसूर का है जो यहां से 120 किलोमीटर की दूरी पर है, वहां से आपको टैक्सी लेनी होगी.

10. ऊटी
तमिलनाडु में नीलगिरि की पहाड़ियों में बसा ऊटी बेहद खूबसूरत है. यहां साल भर मौसम सुहाना बना रहता है. ऊटी में हॉर्स राइडिंग, माउंटेन बाइकिंग और ट्रेकिंग का मजा ले सकते हैं. ऊटी या ऊट कमंडलम पहुंचने के लिए कोयंबटूर निकटतम हवाई अड्डा है, जो ऊटी से 90 किलोमीटर दूर है. सड़क मार्ग से जाना चाहें तो यह तमिलनाडु और कोयंबटूर के सभी मार्ग से जुड़ा हुआ है. ऊटी में सैकड़ों होटल हैं, आप अपनी जेब के हिसाब से पसंद कर सकते हैं. यहां 300 रुपए से लेकर 25 हजार रुपए प्रतिदिन तक के किराए वाले होटल मिल जाएंगे.