Monday, 2 July 2018

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पर, नींबू-बेकिंग सोडा पड़ेंगे भारी!

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पर, नींबू-बेकिंग सोडा पड़ेंगे भारी!

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पर, नींबू-बेकिंग सोडा पड़ेंगे भारी!
Monday, 2 July 2018
प्रत्येक बीमारी कोशिकाओं के खराब होने का परिणाम है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह बीमारी छोटी है या बड़ी। चाहे वह सामान्य सर्दी हो या मानसिक बीमारी या फिर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति। हमारे शरीर की कोशिकाएं खराब तब होती हैं जब उनमें पोषक तत्वों की कमी पायी जाती है। महिलाओं के लिये, सबसे आम स्तन कैंसर या फेफड़ों का कैंसर होता है जबकि पुरुषों के लिये आमतौर पर प्रोस्टेट, फेफड़े और आंत कैंसर होता है। यहां तक कि अब गर्भाशय, गुर्दे और अग्नाशय जैसे कैंसर लगातार पुरुषों और महिलाओं में समय के साथ बढ़ते जा रहे हैं। कैंसर होने का कारण आपका रोज़ाना धूम्रपान, अधिक वज़न और शराब पीना हो सकता है।
पानी के साथ बेकिंग सोडा पीने से ट्यूमर की वृद्धि और कैंसर कोशिकाओं के फैलाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि बेकिंग सोडा कोशिकाओं को लक्षित करके कैंसर का इलाज करने में मदद कर सकता है। यह ट्यूमर की कोशिकाओं को सक्रिय करने के साथ-साथ इसके विकास को धीमा करने की भी कोशिश करता है। फार्मास्यूटिकल्स की तुलना में मैग्नीशियम क्लोराइड, आयोडीन, सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा), और विटामिन सी की खुराक बिना दुष्प्रभाव के उच्च स्तर में लाभदायक है। बेकिंग सोडा एक प्राकृतिक पदार्थ है जिसका प्रयोग हर घर में विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है। फिर भी आजतक कोई नहीं समझ सका कि इसका इस्तेमाल शरीर को ठीक करने और कैंसर को भी रोकने में भी किया जा सकता है। एक कैंसर रोगी में कैंसर कोशिकाओं की भीड़ मिलती है, खासकर जब रोगी में बड़ी मात्रा में lysis मौजूद होते हैं और clustered अवशेष के इन स्तरों को कोशिकाओं द्वारा नहीं समाप्त किया जाता है और यह बाद में फेफड़ों के कैंसर या मस्तिष्क के कैंसर रोगी के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि अवशिष्ट कैंसर कोशिका अवशेष की सामूहिक मात्रा को बहुत खतरनाक माना जाता है।

एक अध्ययन में पाया गया है कि बेकिंग सोडा कैंसर से लड़ सकता है क्योंकि यह ट्यूमर के अंदर कोशिकाओं को बेहतर करने की कोशिश करता है और कीमोथेरेपी दवाओं को मारने में मदद करता है। लुडविग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि बेकिंग सोडा, जो रसोईघर में सामान्य रूप से प्रयोग किया जाता है, कैंसर उपचार के लिए एक प्रभावी घटक है। यह शरीर के कैंसर ट्यूमर के अम्लीय प्रभावों के खिलाफ लड़ने में मदद करता है। आइए जानें कि बेकिंग सोडा कैंसर का इलाज कैसे कर सकता है?

क्षारीय होता है 
कैंसर आमतौर पर कैंडिडा नामक विषाक्त पदार्थ के कारण होता है, हालांकि, बेकिंग सोडा क्षारीय होता है इसलिये कैंडिडा बैक्टीरिया को सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) के रूप में मारता है। कैंडिडा को पूरे शरीर को बाधित करने के लिए कहा जाता है, फिर भी, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैंसर क्षारीय वातावरण में जीवित नहीं रह सकता है। क्षारीय गुण प्रभावी रूप से सूक्ष्मजीवों को खत्म कर सकते हैं।

स्वास्थ्य में सुधार
जिन लोगों को एसिड पीएच स्तर से समस्याएं होती हैं उन्हें सेल फिजियोलॉजी के साथ समस्या होगी और इसके अलावा, यहां तक कि असंतुलित आहार भी एसिड पीएच की स्थिति पैदा करेगा। जब असंतुलित पीएच स्तर होता है तो यह सेलुलर गतिविधियों को तोड़ देगा, जो कैंसर, मधुमेह और दिल की धड़कन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। जैविक जीवन केवल तभी बेहतर काम कर सकता है जब यह गैर-अम्लीय होता है और बेकिंग सोडा का उपयोग करने से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता। बेकिंग सोडा एक प्राकृतिक यौगिक है, जो कई अलग-अलग तरीकों से अविश्वसनीय रूप से सहायक है। बेकिंग सोडा के साथ पीने का पानी ट्यूमर में सेल गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

सेलुलर स्वास्थ्य में सुधार 
ज़्यादातर लोग जो हर रात एक क्षारीय पेय लेते हैं, वे रासायनिक संवेदनशीलता के लक्षणों को कम करने में कामयाब रहते हैं। यह सूजन के खिलाफ सुरक्षा करता है और शरीर के अंगों में कैंसर कोशिकाओं के ज़हरीले रिसाव को रोकता है। ऐसे कई कारक हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं, जैसे free radical damage, UV rays, and chemical toxins क्योंकि वे सेलुलर मेटाबॉलिज़्म को बाधित करने का प्रयास करते हैं।

कवक पर हमला 
बेकिंग सोडा कैंसर के लिये रामबाण इलाज है। इसमें सीधे कवक पर हमला करने की क्षमता होती है। यह एक प्राकृतिक पदार्थ है जो बच्चों और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। यह एक न्यूट्रीलाइजर है, जो विषाक्तता (toxicity) की इस उम्र में एक दवा के रूप में बेहद उपयोगी है।

ट्यूमर की अम्लता को कम करने की कोशिश 
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि यह एक निष्क्रिय एसिड है, जो ट्यूमर की अम्लता को कम करने की कोशिश करता है और इसके अलावा यह निष्क्रिय कोशिकाओं को सक्रिय करने में भी मदद करता है। जो लोग मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों से ग्रसित हैं, वे बेकिंग सोडा जैसे प्राकृतिक यौगिक से लाभ उठा सकते हैं।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पर, नींबू-बेकिंग सोडा पड़ेंगे भारी!
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Oleh

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