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Earthquake Cause Type Interesting Facts in Hindi | भूकम्प की पूरी जानकरी रोचक तथ्यों के साथ

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भूकम्प की पूरी जानकरी रोचक तथ्यों के साथ– भूकंप या भूचाल के बारे में अक्सर सुनते रहते हैं और ज्यादतर लोगो ने इसे महसूस भी किया होगा. आइये जानते हैं भूकम्प से जुडी रोचक जानकारियाँ, आने का कारण, भूकम्प के प्रकार आदि.
What is an Earthquake | भूकम्प क्या हैं?
पृथ्वी की सतह के हिलने को भूकम्प या भूचाल कहते हैं. पृथ्वी के निचली सतहों में उर्जा असंतुलन के कारण कम्पन उत्पन्न होता हैं जिससे पृथ्वी की सतह भाग की परतों में गैसों के असंतुलन के कारण जो वेग उत्पन्न होता हैं, उन्ही वेगों की माध्यम से संपीडन उत्पन्न होता है और पृथ्वी की ऊपरी में कम्पन शुरू हो जाता हैं जिसे हम भूकम्प या भूचाल कहते हैं.
“भूकम्प, पृथ्वी के स्थलमण्डल में ऊर्जा के अचानक मुक्त हो जाने के कारण उत्पन्न होने वाली भूकम्पीय तरंगों की वजह से होता है”
भूकम्प के वेगों की तीव्रता की गति के अनुसार, ये भिन्न-भिन्न परिणाम होते हैं जिसमें पृथ्वी में कम्पन, पृथ्वी की ऊपरी सतह का धसना और फटना, भवन-इमारतों का गिरना, जलाशयों-समुद्रों में उफ़ान, भूस्खलन आदि का कारण भूकम्प बन जाता हैं.

Cause of Earthquake | भूकम्प के कारण
भूकम्प की उत्पत्ति का मुख्य कारण, पृथ्वी की निचली सतह में असंतुलित उर्जा के कारण तरंगे उत्पन्न होती हैं और इसके वेग की तीव्रता अधिक होने पर हम पृथ्वी के ऊपरी सतह पर महसूस करते हैं.

Types of Earthquake or Wave | भूकम्प या तरंगो के प्रकार
तरंगों के आधार पर भूकम्प तीन प्रकार के होते हैं.

  • Primary Wave | प्राथमिक तरंग – ये सबसे तीव्र गति वाली तंरगें है तथा इनका औसत वेग 8 किमी/सेकण्ड होता है जिसके कारण ये तरंगे किसी भी स्थान पर सबसे पहले पहुचती हैं. ठोस,तरल एंव गैस तीनो माध्यमों से गुजर सकती हैं, किन्तु इनका वेग ठोस में अधिकतम व गैस में न्यून होता है. ये अनुदैर्ध्य तरंगें भी कहलाती है
  • Secondary Wave | द्वितीय तरंग – इन्हें अनुप्रस्थ तरंगे भी कहते हैं. यह तरंग केवल ठोस के माध्यम से होकर गुजरती हैं. इनका औसत वेग 4 किमी/सेकण्ड होता है.
  • L-wave | एल तरंग – एल तरंग का एक अन्य नाम R-waves (Ray Light Waves) भी हैं. इन्हें धरातलीय या लम्बी तरंगों के नाम के नाम से भी पुकारा जाता हैं. इन तरंगों की खोज H.D. Love ने की थी. एल तरंगों का वेग सबसे कम (1.5 से 3 किमी/सेकण्ड) होता हैं. ये तरंगे ठोस,तरल एंव गैस तीनो माध्यमों से गुजर सकती हैं.

Interesting Facts about Earthquakes | भूकंप के बारे में दिलचस्प तथ्य

  1. भूगर्भशास्त्र की एक विशेष शाखा, जिसमें भूकम्पों का अध्ययन किया जाता हैं, उसे सिस्मोलॉजी ( Seismology – भूकम्प विज्ञान ) कहते हैं.
  2. Earthquakes ( भूकम्प ) की तीव्रता की माप रिक्टर पैमाने पर की जाती हैं. भूकम्प की तीव्रता मापने वाली रिक्टर स्केल का विकास अमेरिकी वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर द्वारा 1935 में की गई थी.
  3. स्केल पर 2.0 या 3.0 की तीव्रता का अर्थ हल्का भूकम्प होता हैं और 6.2 की तीव्रता का अर्थ शक्तिशाली भूकम्प होता हैं.
  4. भूकंप के उत्पन्न होने का प्रारंभिक बिन्दु केन्द्र या हाईपो सेंटर कहलाता है.
  5. भूकंपीय तरंगों को सिस्मोग्रफ ( Seismograph ) नामक यंत्र के द्वारा रेखांकित किया जाता हैं.
  6. भूकंप ज्यादातर ज्वालामुखी क्षेत्रों में उत्पन्न होते हैं, यहाँ उत्पन्न होने के दो कारण हैं पहला टेक्टोनिक दोष और दूसरा ज्वालामुखी में लावा की गतियाँ.
  7. ग्रीक पौराणिक कथाओं में नेप्चून भूकंप के देवता थे.

How to Protect from Earthquake | भूकम्प से कैसे बचें
अगर आपके पास सही जानकारी और योजना हैं तो किसी भी संकट का सामना बड़ी आसानी से कर सकते हैं. भूकम्प आने के दौरान और उसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से ये सावधानी जरूर रखे. घर में बच्चों को इसके बारे में पूरी जानकरी दे.

  1. भूकम्प के आने पर जैसे ही हलचल या कम्पन महसूस करें, तो तुरंत घर, ऑफिस, बिल्डिंग से बाहर रोड पर या खुले मैदान में खड़े हो जाएँ.
  2. ऐसी स्थिति में न वाहन चलायें और न ही वाहनों में यात्रा करें.
  3. ऐसे स्थिति में घर के गैस सिलिंडर और बिजली का मुख्य स्वीच निकाल दे.
  4. पुराने घर, पेड़, कुएँ, तालब, नदी के आस-पास खड़े होने से बचे.

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