Sunday, 23 September 2018

आयुध पूजा का महत्व | Significance of Ayudha Pooja in Hindi

आयुध पूजा का महत्व | Significance of Ayudha Pooja in Hindi

आयुध पूजा का महत्व | Significance of Ayudha Pooja in Hindi
Sunday, 23 September 2018
विजयादशमी कृतज्ञता का दिन है। इस दिन हमने जीवन में जो भी कुछ प्राप्त किया है, उसके लिए हम कृतज्ञ होते हैं।
इस ब्रह्माण्ड में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, या फिर सब कुछ महत्वपूर्ण है। ज़रा सोचिये, आप मोटरसाइकिल चला रहे हैं और आपकी कमीज़ में बटन नहीं है, तब क्या होगा? कमीज़ उड़कर आपके चेहरे के ऊपर आ जाएगी। यह छोटे से बटन भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।

उपकरणों का आदर
एक सुईं जैसी छोटी सी वस्तु का भी उद्देश्य है। सुईं न हो, तो आपने जो कपड़े पहन रखे हैं, वो भी नहीं होंगे। इसलिए, बहुत छोटी-छोटी चीज़ें जीवन में बहुत महत्व रखती हैं। ‘आयुध पूजा’ वह दिन है जिसमें हम इन उपकरणों का आदर करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञ होते हैं क्योंकि इनका हमारे जीवन में बहुत महत्व है। छोटी-छोटी चीज़ें जैसे पिन, चाकू, कैंची, हथकल से लेकर बड़ी मशीनें, गाड़ियाँ, बसें इत्यादि – इन सभी का आदर होता है। यह एक ही दिव्यता का अंग हैं।

परंपरा के अनुसार नवरात्रि का उत्सव शरद ऋतू के आरम्भ में मनाया जाता है, जब प्रकृति में सब कुछ परिवर्तित हो रहा होता है। ये नौ रातें बहुत अनमोल होती हैं, क्योंकि साल के इन दिनों में सृष्टि की कुछ सूक्ष्म ऊर्जाएं बहुत बढ़ी हुयी होती हैं। ये सूक्ष्म ऊर्जाएं अंतर्मुखी होने में, प्रार्थना और जाप करने में और आध्यात्मिक साधना करने में हमारी मदद करती हैं जिससे इनका अनुभव और अधिक गहरा होता है।

एक ही दिव्यता
सभी उपकरण मन के द्वारा रचित हैं और मन ईश्वर के द्वारा रचित है। बल्कि, मन ईश्वर ही है। और इस मन में कुछ निर्माण करने के जो भी विचार आते हैं, जैसे हवाई जहाज, कैमरा, माइक – ये सभी विचार एक ही स्त्रोत से आये हैं – और वह स्त्रोत है ‘देवी’।

इसी का जाप हम चंडी होमा में करते हैं – या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता अर्थात, देवी माँ जो प्रत्येक जीव के अन्दर बुद्धि के रूप में निवास करती हैं – उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ। ये एक ही दिव्यता है जो हर जीव में बुद्धि बनकर प्रकट होती है।

यह एक ही दिव्यता है जो हर मनुष्य में भूख और नींद के रूप में उपस्थित है। और यह एक ही दिव्यता है जो उत्तेजना और अशांति के रूप में भी व्याप्त है। केवल यह सजगता, कि हर ओर केवल एक वही दिव्यता मौजूद है – हमारे मन को शांत कर देता है।
तो आपको यह कहने की ज़रुरत नहीं है कि, ‘मैं इस मन का क्या करूं?’ आप अपने मन के साथ कुछ भी करने का प्रयास न करें! केवल विश्राम करें! जितना भी हो सके उतना सेवा के कार्य करें और केवल विश्राम करें।

अगर आपको सोचना ही है, तो यह सोचिये कि आप विश्व के लिए क्या कर सकते हैं। ये सोचने का कोई लाभ नहीं है कि आप अपने मन के साथ क्या करें। एक परम शक्ति है जो आपके मन को संभाल रही है। आज के दिन (विजयादशमी) आईये हम सब यह संकल्प लें कि हमें जीवन में जो भी कुछ मिला है उसका उपयोग हम विश्व के कल्याण के लिए करें। आईये कुछ बड़ा सोचें।

आयुध पूजा का महत्व | Significance of Ayudha Pooja in Hindi
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Oleh

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